शनिवार, 11 जुलाई 2026

नैनो कहानियाँ: लक्ष्य

लक्ष्य 1:

कॉंग्रचुलेशन्स, तीसरे राउंड के इंटरव्यू के बाद आप सेलेक्ट हो गये हैं. हमारी कम्पनी में साठ लोग हैं, जो छ: प्रोजेक्ट्स पर काम रहे हैं. आपको एक विशिष्ट टीम के लिये चयनित किया गया है. आपके प्रोजेक्ट मैनेजर बतायेंगे कि उनकी टीम की आपसे क्या आपेक्षायें हैं. वही आपको ट्रेनिंग देंगे, सिखायेंगे और आपका मूल्यांकन भी करेंगे. 

लक्ष्य 2:

वेलकम टु आवर ऑर्गनाइजेशन. दो रिटन और एक साक्षात्कार के बाद हाइली क्वालिफ़ाइड लोगों का चयन होता है. यहाँ साठ लोग छिहत्तर प्रोजेक्ट्स पर का काम कर रहे हैं ताकि किसी को प्रमोशन में दिक्कत न हो. हमारे यहाँ काम करने की फ्रीडम है. आप भी एक प्रोजेक्ट बनाइये. अपना लक्ष्य स्वयं निर्धारित कीजिये. हम साल भर नियंत्रण और एक बार मूल्यांकन करते हैं. 

लक्ष्य 3:

बॉस एम्प्लॉयी से - अपना लक्ष्य निर्धारित करो ताकि हम उसकी मॉनिटरिंग कर सकें. 

एम्प्लॉयी बॉस से - सर लक्ष्य और दिशा आप तय करें. वी विल नॉट लीव सिंगल स्टोन अनटर्नड. उसकी प्राप्ति के लिये हम हर सम्भव प्रयास करेंगे. 

बॉस एम्प्लॉयी से - नौकरी करो नौकरी. ये बातें इंटरव्यू में ही अच्छी लगती हैं. प्रोन्नति तुम्हें चाहिये, मुझे नहीं. 

लक्ष्य 4:

समस्यायें बहुत हैं, बहुआयामी हैं. एकांगी प्रयास भूत में नाकाफ़ी सिद्ध हुये हैं. आवश्यकता है एकीकृत समाधान पर मिल कर काम करने की. शीर्ष नेतृत्व का कार्य है, समस्याओं की प्राथमिकता तय करना और लक्ष्य प्राप्ति के लिये मार्गदर्शन देना. यदि लक्ष्य का ज्ञान और भान है, तो काम करना और करवाना आसान हो जाता है. इसके लिये ज़रूरी है, बॉस के लिये लक्ष्य और उसकी लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता. 

लक्ष्य 5:

लक्ष्य विहीनता की स्थिति में ऑर्गेनाइज़ेशन के कर्मचारियों को व्यस्त रखना भी कला है. पुरखन दादी भी स्वयं को व्यस्त रखने के लिये करती थीं, इस कोठरी का माल उस कोठरी. लक्ष्य तय हो तो काम खत्म हो सकता है. फिर मैनपावर क्या करेगी. अलादीन के जिन्न को बिज़ी भी तो रखना है.

-वाणभट्ट

1 टिप्पणी:

  1. काम करने और करवाने के नये-नये तरीक़े ढूँढे जा रहे हैं, कहने को हर कोई अपना मालिक भी है और तलवार ऊपर लटकी भी है

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