मंगलवार, 7 जुलाई 2026

लघु कथा - दिशा

सभा सुधारकों की थी. कोई जलवायु परिवर्तन से प्रभावित न होने वाली प्रजाति के विकास में लगा था. कोई बिना खाद-पानी के उत्पादन बढ़ाने पर उद्दत था. किसी ने कीट-बीमारी की चुनौती को स्वीकार किया था. कुछ जीन ही बदल देने की फिराक़ में थे. वहाँ उपस्थित एक प्रोसेसर बोला पड़ा - सर, अरहर में गोंद कम हो जाये, तो इसका छिलका भी मटर की तरह उतर जाये. मिलिंग लॉस कम हो जायेगा. राजमा रात भर भिगोये बिना दो सीटी में गल जाये तो क्या बात है. सबने समवेत स्वर में जवाब दिया - बड़ी चुनौतियाँ ही विज्ञान को आकर्षित करती हैं. समस्यायें बड़ी हों तभी फण्ड भी मिलता है. इन कामों के लिये भला कौन फण्ड देगा. कभी आवश्यकता थी जननी, आविष्कार की. अब फण्डिंग तय करती है, दिशा विज्ञान की. 


-वाणभट्ट

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लघु कथा - दिशा

सभा सुधारकों की थी. कोई जलवायु परिवर्तन से प्रभावित न होने वाली प्रजाति के विकास में लगा था. कोई बिना खाद-पानी के उत्पादन बढ़ाने पर उद्दत था...