तुम थीं
तब कभी नहीं लगा
तुम हो
अब जब
तुम नहीं हो
तो
लगता है
तुम हो
-वाणभट्ट
एक नाम से ज्यादा कुछ भी नहीं...पहचान का प्रतीक...सादे पन्नों पर लिख कर नाम...स्वीकारता हूँ अपने अस्तित्व को...सच के साथ हूँ...ईमानदार आवाज़ हूँ...बुराई के खिलाफ हूँ...अदना इंसान हूँ...जो सिर्फ इंसानों से मिलता है...और...सिर्फ और सिर्फ इंसानियत पर मिटता है...
कभी-कभी आपको लगता होगा कि इतिहास हमें पढाया ही क्यों जाता है, जब सारे प्रीमियम क्वालिटी जॉब्स पर विज्ञान के छात्र काबिज हैं. लोग तर्क दे सकत...
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