शनिवार, 15 मार्च 2014

पिता की घोषणा 

समस्त मानवीय सम्वेदनाओं में लिपटा
संशयों से घिरा
प्रवृत्तियों में जकड़ा   
मै। 

सम्पूर्ण सत्यनिष्ठा के साथ 
स्वयं को 
यह कह सकने में असमर्थ पाता हूँ 
कि 
भगवान हूँ
मात्र इसलिये 
कि 
मै पिता हूँ।  

जन्म के समय 
देखा है मैंने  
प्रभु का अंश 
साक्षात तुझमें। 

यदि सम्भव हो 
तो क्षमा करना  
कि 
पूर्वाग्रहों से ग्रसित 
मैंने प्रयास किया 
भगवान को
इन्सान बनाने का। 

- वाणभट्ट 


15 टिप्‍पणियां:

  1. पूर्वाग्रहों से ग्रसित
    मैंने प्रयास किया
    भगवान को
    इन्सान बनाने का। bahut khoob ......pita ki nazar bahut paini hoti hai ......

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  2. बहुत सुन्दर और गहन अभिव्यक्ति...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  3. गूढ़ सच का गहरा अनुभव सहज शब्दों में उतार दिया !

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  4. बहुत ही गहरी पंक्तियाँ ... कई बार पढ़ा .. फिर लगा ये अनुभूति है सिर्फ महसूस करने के लिए ...
    होली कि हार्दिक बधाई ...

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  5. गहरे भाव लिए बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  6. सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति...!
    सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाए ....
    RECENT पोस्ट - रंग रंगीली होली आई.

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  7. वाह! सुन्दर,भावपूर्ण प्रस्तुति....आप को होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं....
    नयी पोस्ट@हास्यकविता/ जोरू का गुलाम

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  8. ह्रदय को छूती हुई पंक्तियाँ.

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  9. होली की हार्दिक शुभकामनायें

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  10. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...होली की हार्दिक शुभकामनायें.....Bhramar5

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  11. बहुत सुन्दर और गहन अभिव्यक्ति

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यूं ही लिख रहा हूँ...आपकी प्रतिक्रियाएं मिलें तो लिखने का मकसद मिल जाये...आपके शब्द हौसला देते हैं...विचारों से अवश्य अवगत कराएं...