गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

सम्बल 

झुर्रियों से लदी 
लाठी के सहारे रेंगती बुढ़िया  

चुम्बक लगी लकड़ी से 
लोहा बटोरती बंजारन सी औरत 

कुछ सिक्कों के लिए दिन-रात 
मेहनत करता अपाहिज भिखारी 

ट्रेन से कटी जाँघ पर 
कृत्रिम पाँव बाँधता आदमी 

बजबजाती गलियों में 
घोड़ी के आगे नाचते लोग

तेल चुपड़े बालों को गूँथ 
चटक बिंदी लगाती मजदूरन 

कूड़े में खज़ाना खोजती 
अबोध लड़कियाँ 

गंदे मैले कपड़ों में 
चमकती आँखें वाले बच्चे 

झोपड़ी से आती 
मासूम की किलकारी 

सबूत हैं जीवन का  

जो 
झकझोर के उठा देते हैं 
सोयी पड़ी
जिजीविषा को

और ज़िन्दगी बढ़ जाती है 

- वाणभट्ट   

21 टिप्‍पणियां:

  1. जीन लेने की यही इच्छा शक्ति दिये रहती है।

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  2. और ज़िंदगी आगे बढ़ जाती है..... गहरा अवलोकन ...

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  3. बेईमानों ने जेबें भर ली कहॉ छिपाया लूट का माल
    नौनिहाल भूखे नंगे हैं आज़ाद देश का यह हा हाल ।
    तुम गोरों से कहॉ अलग हो दुर्योधन दुःशासन-सम हो
    खा लेते हो खीर तुम्हीं तुम जनरल-डायर से क्या कम हो?

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  4. जीवन अपना रास्ता निकाल ही लेता है।

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  5. बहुत ही लाजवाब ... जीवन को प्रेरणा देती रचना ... सच कहा है जीवन तो है ... और सांसों के क्रम को जीवित रखना ही जिंदगी है ...

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  6. ह्रदय को गहरे छू रही है आपकी यह रचना.

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  7. मर्म पर प्रहार करती हुई रचना..

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  8. बहुत दिनों के बाद आपके पोस्ट पर आया हूं। प्रस्तुति काफी अच्छी लगी। मेरे नए पोस्ट "सपनों की भी उम्र होती है",पर आपका इंतजार रहेगा।

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  9. aaah

    तेल चुपड़े बालों को गूँथ
    चटक बिंदी लगाती मजदूरन ....:)...

    zindgi ke kitni mgr eham tukdonko kitne nzdeeki se dekhaa aur snjoya aapne...sab dekhte hain he ye sab...mg snjokm hi paate hain


    bahut prsnntaa hui...aapko pdh kr..:)

    aise hi likhte rhe

    take care

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  10. झोपड़ी से आती
    मासूम की किलकारी

    सबूत हैं जीवन का

    वाह , क्या बात है , खुबसूरत अभिव्यक्ति !!

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  11. गहरी संवेदनात्मक प्रस्तुति।।।

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  12. बहुत खूब आदरणीय!
    जीवन संघर्ष के विभिन्न आयामों को दर्शाती अदभुत रचना ...............

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  13. आपकी नई रचना ढूँढ रही थी , मुझे नहीं मिली ।

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  14. यथार्थपरक मार्मिक रचना ....

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  15. संवेदना से लवरेज प्रस्तुति।अप्रतिम । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा।

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  16. दिल की गहराइयों से निकले सुन्दर और सार्थक शब्द

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  17. दिल को छु जानेवाली रचना

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यूं ही लिख रहा हूँ...आपकी प्रतिक्रियाएं मिलें तो लिखने का मकसद मिल जाये...आपके शब्द हौसला देते हैं...विचारों से अवश्य अवगत कराएं...