सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

आज का युवा

आज का युवा 
अपनी परिपक्वता को
तमगे की तरह
लगा के चलता है

उसे कुछ ही समय में 
आकाश छूना है

दौड़ लगी है
और हर कोई जीतना चाहता है
जब कि
मालूम है कि पिरामिड की नोक 
पर खतरा है किसी भी तरफ 
लुढ़क जाने का 

एवरेस्ट की चोटी पर
सिर्फ एक की जगह है
फिर भी असमंजस और अज्ञान से भरा वो 
दौड़ रहा है
एक मरीचिका से दूसरी 
फिर तीसरी की ओर
असमंजस को तो मानता है
पर अज्ञानता से अनभिज्ञ है

और पथ प्रदर्शक बुजुर्ग
अभी भी जकडे हैं 
जंग लगी रुढियों में
जो रोकतीं हैं 
उन्हें आकाश छूने से 

ये जोश भरे
युवा चमकना चाहते हैं
पिरामिड की चोटी पर
कुछ पल के लिए ही सही

ये धड़कती जवान रूहें
कम समय में 
कुछ कर गुजरना चाहतीं हैं
गुमनाम या गुमशुदा जीवन 
इनको नहीं गवारा
ये तो 
पल भर में दुनिया पलटना चाहतीं हैं


यही जूनून है
जो देश को आगे ले जायगा
इसी का तो
कब से इंतज़ार था


- वाणभट्ट 









12 टिप्‍पणियां:

  1. ये जोश भरे
    युवा चमकना चाहते हैं
    पिरामिड की चोटी पर
    कुछ पल के लिए ही सही
    ......... नशा ही सही , परिवर्तन की आग बने हैं

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  2. शिखर पर सफलता ही नहीं मिलती खोता भी बहुत कुछ है ...... यह बिना जाने दौड़ रहे है ...अच्छी लगी आपकी रचना

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  3. ये धड़कती जवान रूहें
    कम समय में
    कुछ कर गुजरना चाहतीं हैं
    गुमनाम या गुमशुदा जीवन
    इनको नहीं गवारा
    ये तो
    पल भर में दुनिया पलटना चाहतीं हैं ...

    पीडियों के अंतराल को बाखूबी लिखा है आपने ... पर क्या इतनी तेज़ी ठीक है .. ये तो समय ही बतायगा ....

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  4. सही कहा है आपने। धन्यवाद।

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  5. सार्थक व सटीक अभिव्‍यक्ति ।

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  6. बहुत बढ़िया..सार्थक लेखन..

    शुभकामनाएँ.

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  7. सही अभिव्यक्ति दी है आपने युवा भावों को.

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  8. देश का भविष्य युवाओं के इसी जोश और उत्साह के कारण बेहतर दिखता है।

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  9. युवा भी क्या करे, एवरेस्ट की सोचेगा तब शायद नीलगिरि तक पहुंचेगा।

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  10. yuvaa-bhaav ki steek abhvyakti
    kaavy mei sandesh chhipaa hai .

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  11. इसी जुनून का इन्तज़ार था देश को । असफलता नही नीचा ध्येय ही गलत है ।

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