शनिवार, 18 जून 2011

मेरा भारत महान

हम होंगे कामयाब?
कब होंगे कामयाब???

पुरखे हमारे थे महान,
देश की हमारे थे शान,
हम उनकी संतान,
बिना हर्र-फिटकरी के,
बन गए महान.

कर्म भला हम क्या करते,
सब उन लोगों ने कर डाला मरते-मरते,
हम भी महान बन जाते,
गर अंग्रेज अब भारत आते,
महाभारत आज होती,
रावण आज होते,
तो क्या हममें से कुछ गाँधी, कृष्ण या राम न होते.

पर सच तो ये है,
अंग्रेज अभी भी बसे हैं जेहन में,
महभारत मचा है जगहों-जगहों पे,
सीतायें कैसे निपटें रावणों से.

परिस्थितियां वहीँ हैं 
अंतर सिर्फ इतना है
गाँधी ने लंगोट आँखों पे कस लिया है 
कृष्ण का चक्र हांथों से छूट गया है
और राम का नाता हनुमान से टूट गया है.

कहने का मतलब है सिर्फ इतना 
महान बनने का स्कोप अब भी है उतना
तो मेरे भाई 
वाई डोंट यू ट्राय!
(माइंड ईट  यू ट्राय) !!!

- वाणभट्ट 

15 टिप्‍पणियां:

  1. परिस्थितियां वहीँ हैं
    अंतर सिर्फ इतना है
    गाँधी ने लंगोट आँखों पे कस लिया है
    कृष्ण का चक्र हांथों से छूट गया है
    और राम का नाता हनुमान से टूट गया है.


    कहने का मतलब है सिर्फ इतना
    महान बनने का स्कोप अब भी है उतना
    तो मेरे भाई
    वाई डोंट यू ट्राय!
    (माइंड ईट यू ट्राय) !!!

    वाह,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  2. प्रयास जारी रहे| धन्यवाद|

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  3. आपकी रचना बहुत अच्छी लगी।
    --
    पितृ-दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

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  4. पर सच तो ये है,
    अंग्रेज अभी भी बसे हैं जेहन में,
    महभारत मचा है जगहों-जगहों पे,
    सीतायें कैसे निपटें रावणों से.
    bahut gahre bhaw

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  5. परिस्थितियां वहीँ हैं....

    सही कहा आपने
    ज़रुरत है तो बस मानसिकता बदलने की
    अच्छा आह्वान है !!

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  6. आज के हालात पे सही टीका किया है ... पर प्रयास जारी रखना जरूरी है ...

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  7. स्कोप तो है ही...ट्राई करने में कोई हर्ज नहीं....

    बहुत उम्दा!!

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  8. भाई वानभट्ट जी बहुत सुंदर कविता बधाई |

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  9. बिलकुल सही ट्राई करने मैं क्या हर्ज है

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  10. bhaarat to mahaan hai hi....

    likin iski mahaanta aur samprabhutw ko banaye rakhna aapke aur hamaar haath me hai...

    dekhte hain,aap aur hum ise kin manzilon takpahunchaate hain.....

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  11. वाणभट्ट जी ,
    कविता के माध्यम से आपने कोशिश करने की बात कही है । शायद बहुत से लोग अपने भरसक कर भी रहे हैं... कुछ आप भी , कुछ हम भी ...कुछ इस रचना को पढने के बाद ही ....

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  12. कुछ लोग ट्राय कर रहे हैं उनका साथ देने की बात है । अपने अपने स्तर पर हम भी ट्राय करें । कविता के माध्यम से आपने आज के स्थिति पर सही व्यंग किया है पर हो रही है कोशिश ।

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  13. यथार्थ का काव्यमय सुन्दर वैचारिक प्रस्तुतिकरण...

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  14. बेहतरीन रचना |कोशिश रंग जरुर लाएगी|

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यूं ही लिख रहा हूँ...आपकी प्रतिक्रियाएं मिलें तो लिखने का मकसद मिल जाये...आपके शब्द हौसला देते हैं...विचारों से अवश्य अवगत कराएं...