शनिवार, 28 मई 2011

अविश्वास

थका सा 
अविश्वास
तुम्हारे चेहर पे ठहर जाता है
कुछ क्षण को.

तुम सोचती हो
मेरे बारे में.

जबकि मै जानता हूँ
खुद को,
और तुम्हें भी.

तुम्हें चिंतित देख
आश्वस्त हूँ 
कि
ये स्वाभाविक भी है.

फिर भी,
तुम्हारे अविश्वास को
जीतने के लिए
आवश्यक है
थोड़ी दूरी.

हमारे बीच.

- वाणभट्ट






19 टिप्‍पणियां:

  1. एक दूसरे के विश्वास के लिए दूरी भी आवश्यक है।

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  2. फिर भी,
    तुम्हारे अविश्वास को
    जीतने के लिए
    आवश्यक है
    थोड़ी दूरी.

    हमारे बीच.


    गहन बात कह दी है ... सुन्दर प्रस्तुति

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  3. विश्वास जताने के लिए दूरी भी जरुरी है| धन्यवाद|

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  4. फिर भी,
    तुम्हारे अविश्वास को
    जीतने के लिए
    आवश्यक है
    थोड़ी दूरी.

    हमारे बीच.

    बहुत सुंदर रचना,
    - विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. फिर भी,
    तुम्हारे अविश्वास को
    जीतने के लिए
    आवश्यक है
    थोड़ी दूरी.

    सही कहा सर और बहुत खूबसूरती से कहा ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. हाँ यह भी सही है कि विश्वास जीतने के लिए दूरी की उतनी ही ज़रूरत है...

    सुख-दुःख के साथी पर आपके विचारों का इंतज़ार है..
    आभार

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  7. वह बहुत ही उम्दा लिखा है आपने ! मेरे ब्लॉग पर जरुर आए ! आपका दिन शुब हो !
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    Shayari Dil Se

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  8. विश्वास या अविश्वास ... दोनो को ही जीतना ज़रूरी .... क्या बात है ..

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  9. फिर भी,
    तुम्हारे अविश्वास को
    जीतने के लिए
    आवश्यक है
    थोड़ी दूरी.

    हमारे बीच.

    गहन अभिव्यक्ति..... प्रभावित करती रचना

    उत्तर देंहटाएं
  10. अविश्वास ,
    विश्वास का जनक भी हो सकता है
    अंतर्द्वंद को उजागर करती हुई
    सुन्दर अभिव्यक्ति ....
    बहुत अच्छी कविता !

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  11. फिर भी,
    तुम्हारे अविश्वास को
    जीतने के लिए
    आवश्यक है
    थोड़ी दूरी.

    हमारे बीच....

    Awesome !

    Great creation Vagbhatt ji.

    .

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही अच्छी कविता !
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - अज्ञान

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  13. कभी-कभी दूरी भी जरूरी है...सुन्दर कविता....

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  14. मनोजगत को कुरेदती रचना .तुम्हारे और पास आने के लिए भी दूरी बहुत ज़रूरी है .
    "फिर भी -
    तुम्हारे अविश्वाश को जितने के लिए ,
    आवशयक है थोड़ी दूरी -
    हमारे बीच ."
    सुन्दर मनो -वैज्ञानिक रचना .

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  15. वाह...बहुत भावपूर्ण...बहुत सुन्दर

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यूं ही लिख रहा हूँ...आपकी प्रतिक्रियाएं मिलें तो लिखने का मकसद मिल जाये...आपके शब्द हौसला देते हैं...विचारों से अवश्य अवगत कराएं...