मंगलवार, 10 मई 2011

हाई-वे 

सड़क जाती नहीं कहीं

इस सिरे से उस सिरे तक पसरी पड़ी ये 

न जाने कितने गुजर गए

पता नहीं किस जिद पर अड़ी ये 

रौंद गए जो इसकी छाती

कुचल गए जो इसके ख्वाब

उनके लिए भी ये बुदबुदाती 

अलविदा दोस्त, खुदा हाफिज़ जनाब

इसका बस चलता तो ये रास्ता बदल देती

इसका बस चलता तो ये बदला भी लेती

पर इसका तो सपना

हर कोई हो अपना

इसीलिए ये सब दर्द सह जाती

सबको मंजिल तक पहुंचाती 

मालूम है इसे कि कहीं हर घर में 

कुछ जोड़ा आँखें हैं किसी के इंतज़ार में 

कभी तेज़ रफ़्तार में

फनफनाती कार में

देखो ब्रेक लगा के 

कैसे चिन्चियाती है ये

जैसे कोई बल प्रयोग करे

और मुंह भींच के चीखने भी न दे


- वाणभट्ट









17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति|धन्यवाद|

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  2. कभी तेज़ रफ़्तार में


    फनफनाती कार में
    देखो ब्रेक लगा के
    कैसे चिन्चियाती है ये
    जैसे कोई बल प्रयोग करे
    और मुंह भींच के चीखने भी न दे

    बहुत सुंदर ....गहन अभिव्यक्ति...

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  3. सड़क जाने कहाँ से कहाँ तक ले चली साथ अपने...


    बहुत बेहतरीन रचना.

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  4. you are writing really nice,
    (sorry for comment in english for now)
    -Vivek jain

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  5. sadak ke maadhyam se
    sdbhaav aur smarpan ki paribhasha keh di aapne
    achhaa prayaas
    achhee kavitaa .

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  6. गहन अनुभूति और उत्तम सोच। प्रभावशाली रचना।

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  7. hmmm..... ! par sadak to chalti hai...as a matter of fact sadak hi to chalti hai..hum kahaan chalte hain.....chalte hain kya?

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  8. "इसका तो सपना
    हर कोई हो अपना
    इसीलिए ये सब दर्द सह जाती
    सबको मंजिल तक पहुंचाती"

    बहुत सुंदर - प्रेरक सन्देश

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  9. खुद की मंजिल से दूर सबको मंजिल तक पहुंचाती है...

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति.....

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  10. विषय बहुत अच्छा है पर अधूरा-अधूरा सा लगा... आप से और भी सुनना चाहूँगा इस हाईवे के बारे में...

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  11. मैं आपकी बात से सहमत नहीं, सडक के बिना कोई जाता नहीं कहीं, या कहे जा ही नहीं सकता कहीं, अगर सडक ना होती तो बहुत कुछ ना होता?

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  12. हौसला अफजाई के लिए सभी का शुक्रिया...इसी से लगता है की कोई पढ़ भी रहा है...

    बाबुषा जी से तर्क?...भागने का रास्ता नहीं मिलेगा...सड़क तो बस पड़ी रहती है...जो चाहे रौंद के निकाल जाए...मै भाग लेता हूँ...

    जाट देवता, धन्यवाद... मै ये कब कह रहा हूँ की सड़क जरुरी नहीं...पर जरा अहिस्ता चला कीजिये...जितने ब्रेक आप लगते हैं...बेचारी पर क्या गुजरती है...यही बयां करने की कोशिश की है...पेट्रोल भी बर्बाद होता है...टायर भी घिसता है...नुक्सान ही नुक्सान है...

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  13. A beautiful message has been given through roads. Nice creation.

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  14. sadak kee bebasee, uska dard sab to bata rahee hai ye kawita. sunder prastuti ke liye badhaee aapko.
    Aap mere blog par aaye tippni kee uska bahut shukriya, sneh banaye rakhen.

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यूं ही लिख रहा हूँ...आपकी प्रतिक्रियाएं मिलें तो लिखने का मकसद मिल जाये...आपके शब्द हौसला देते हैं...विचारों से अवश्य अवगत कराएं...